बिंद्रा की कमी खलेगी भारत को?


अभिनव बिंद्रा

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वे भारत के लिए किसी व्यक्तिगत स्पर्द्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले इकलौते ओलम्पियन हैं.

लेकिन इंचियोन एशियाई खेलों के दौरान प्रोफ़ेशनल निशानेबाज़ी से सन्यास की घोषणा करके अभिनव बिंद्रा ने सबको चौंका दिया.

बिंद्रा ने पिछले दिनों ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों को भी शानदार अंदाज़ में अलविदा कहा था.

इससे पहले उन्होने साल 2010 में दिल्ली, 2006 के मैलबर्न और साल 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में 10 मीटर एयर राइफल (पेयर) में स्वर्ण पदक जीता था.

साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक खेलों में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफ़ल स्पर्द्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के स्टार निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा ने कोरिया में जारी इंचियोन एशियाई खेलों में मंगलवार को 10 मीटर एयर राइफल टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता.

विवादों का केंद्र

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इसके साथ ही उनके पेशेवर निशानेबाज़ी करियर का अंत हो गया.

इसके उलट साल 2006 में दोहा एशियाई खेलों में वह चोटिल होने के कारण हिस्सा नही ले सकें.

साल 2010 में ग्वांग्झू एशियाई खेलों में उन्होने 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता.

एशियाई खेलों में उन्हे कभी स्वर्णिम कामयाबी नही मिली. अभिनव बिंद्रा अनेक बार विवादों का केंद्र भी बने.

साल 2001 में जब उन्हे राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया तब हर तरफ चर्चा थी कि क्या उनकी उपलब्धियां वाकई इतनी हैं?

हांलाकि बाद में उन्होने कामयाबी के झंडे गाड़े. इसके अलावा अभिनव बिंद्रा ने भारत में खेल सुविधाओं को लेकर हमेशा ज़ोरदार आवाज़ उठाई.

बुजुर्ग निशानेबाज़ नहीं

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28 सितंबर को अभिनव 32वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं.

अभिनव बिंद्रा ने खेल संघों पर सालों से जमे पदाधिकारियों के ख़िलाफ भी मोर्चा खोला.

अब भले ही अभिनव बिंद्रा प्रोफेशनल तौर पर निशाना ना लगाए, लेकिन शौकिया तौर पर निशानेबाज़ी जारी रखेंगे.

उनका इरादा साल 2016 में ब्राज़ील के रियो ओलंपिक में भाग लेना भी है.

ऐसा नही हैं कि उनके निशाने में अब दम नही रहा लेकिन शायद परिवार को अधिक समय देना चाहते हैं.

वर्ना इसी महीने 28 सितंबर को अपना 32वां जन्मदिन मनाने जा रहे बिंद्रा अभिनव भले ही ना हों लेकिन बुज़ुर्ग निशानेबाज़ तो कतई नहीं कहे जा सकते.

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