Bollywood News In Hindi : Unusual stories of Jubilee Kumar aka Rajendra Kumar’s life | 150 रु. तनख्वाह पर डायरेक्टर एचएस रवैल के असिस्टेंट बने थे राजेंद्र कुमार, पहचान बनाने में लगे थे 7 साल

दैनिक भास्कर

May 02, 2020, 01:14 PM IST

राजेंद्र कुमार का जन्म पंजाब के सियालकोट में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। पिता का लाहौर में कपड़ों का कारोबार हुआ करता था। बंटवारे के बाद राजेंद्र कुमार मुंबई आ गए। हीरो बनने का सपना लिए राजेंद्र ने फिल्म ‘जोगन’ में कैमियो कर अपनी शुरुआत की। लेकिन उनकी कोई खास पहचान नहीं बनी। फिल्म निर्माता देवेंद्र गोयल उनके अभिनय से प्रभावित हुए और उन्हें अपनी अगली फिल्म में लीड रोल देने का वादा किया।

150 रुपए की तनख्वाह पर असिटेंट बने

डेढ़ साल बाद उन्होंने फिल्म ‘वचन’ में राजेंद्र कुमार को मुख्य किरदार के तौर पर लिया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही। इसके साथ ही एक सितारे का उदय हो गया।  गीतकार राजेन्द्र कृष्ण की मदद से 150 रुपए की तनख्वाह पर डायरेक्टर एचएस रवैल के सहायक के तौर पर भी राजेंद्र कुमार ने काम किया। राजेंद्र को फिल्मों में काम तो मिल गया था, लेकिन इसके बाद भी पहचान बनाने में उन्हें सात साल लग गए। जब ‘मदर इंडिया’ आई तो राजेन्द्र कुमार की भी बाकी एक्टर्स के साथ जमकर तारीफ हुई। इसके बाद 1963 में ‘मेरे महबूब’ सुपरहिट हुई और फिर राजेन्द्र कुमार का सिक्का चल पड़ा।

साधना का हीरो बनने के लिए राजेन्द्र ने आधी फीस में किया काम

रामानंद सागर ‘आरजू’ फिल्म बनाने जा रहे थे। इसमें उन्होंने बतौर हीरो राजेंद्र कुमार को साइन कर लिया था, लेकिन वे चाहते थे कि फिल्म में हीरोइन साधना ही हों, क्योंकि उन दिनों साधना का किसी भी फिल्म में होना सफलता की गारंटी माना जाता था पर वे राजेंद्र कुमार से ज्यादा फीस मांग रही थीं।

जब राजेंद्र कुमार को यह बात पता चली तो उन्होंने खुद साधना से बात की। साधना थीं कि मानने का नाम नहीं ले रही थीं। तब राजेंद्र कुमार ने रामानंद सागर से कहा कि मैं आधी फीस में भी काम कर लूंगा आप साधना की डिमांड पूरी कर दें। फिल्म बनने के बाद खूब हिट हुई। रामानंद सागर ने राजेंद्र कुमार का ये अहसान उतारने के लिए दिल्ली टेरिटरी की आमदनी उनके नाम कर दी। इस तरह राजेंद्र कुमार को अपनी फीस से कई गुना ज्यादा पैसे मिल गए।

शादी के लिए जिस लड़की से किया वादा उसी के संग लिए फेरे

राजेंद्र कुमार फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने की कोशिश कर रहे थे। उन्हीं दिनों उनका एक रिश्तेदार आया और उन्हें अपने दोस्त के पास ले गया। उस दोस्त ने ये बात रखी कि मेरी एक बेटी है अगर तुम उसे अपने काबिल समझो तो शादी कर लो। इस पर राजेंद्र ने उनसे कहा कि देखिए मैं मुंबई में स्ट्रगल कर रहा हूं। क्या आपकी बेटी मुफलिसी के इन हालात में मेरा साथ निभा पाएगी।

फिर उन्होंने अपनी होने वाली पत्नी शुक्ल कुमार से बात की और शादी के लिए राजी हो गए। मुश्किल तो तब आई जब वे दिल्ली पहुंचे। वहां उनके रिश्तेदारों ने एक लड़की देख रखी थी। तब राजेंद्र ने उनसे कहा कि वे कहीं और जुबान दे चुके हैं, इसलिए इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर सकते।

राजेंद्र कुमार और सायरा बानो का अफेयर भी सुर्खियों में रहा

राजेंद्र कुमार शादीशुदा और तीन बच्चों के पिता थे। उन दिनों सायरा बानो के साथ उनकी ‘आई मिलन की बेला’, ‘झुक गया आसमान’ और ‘अमन’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में आईं। दोनों की जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आ रही थी। दोनों का अफेयर भी चर्चा में रहा। कहा तो ये भी जाता है कि राजेंद्र और सायरा एक दूसरे से शादी करना चाहते थे।

बाद में सायरा, दिलीप कुमार की तरफ आकर्षित हो गईंं और राजेंद्र को ये बात जब पता चली, तो उन्होंने सायरा से ब्रेकअप कर लिया। ऑटोबायोग्राफी में यह बात उन्होंने एक्सेप्ट की है कि सायरा एक खूबसूरत और प्यारी लड़की थीं। हम एक-दूसरे को काफी पसंद करते थे।

11 हजार लेकर जब सावन कुमार पहुंचे और राजेंद्र को साइन किया

एक समय ऐसा भी था जब राजेंद्र कुमार को फिल्में नहीं मिल रही थीं, उन दिनों वे अपने बंगले से बाहर ही नहीं निकलते थे। डायरेक्टर सावन कुमार उन्हें अपनी फिल्म ‘साजन बिना सुहागन’ में साइन करना चाहते थे। इस फिल्म में सावन कुमार ने राजेंद्र के अपोजिट अपनी फेवरेट हीरोइन नूतन को रखा था। वे इस उद्देश्य से भी उनके पास गए थे कि किसी जमाने में राजेंद्र, नूतन को बहुत चाहते थे।

जब वे राजेद्र के घर पहुंचे तो देखा वहां राज कपूर साहब पहले से बैठे थे। खैर उन्होंने राजेंद्र कुमार को 11 हजार रुपए का चेक दिया और फिल्म के लिए साइन कर लिया। तभी राज कपूर बोले फिल्म का पहला क्लैप मैं देने आऊंगा तो सावन बोले- आप क्लैप देने नहीं सिल्वर जुबली ट्रॉफी देने आइएगा। फिल्म हिट हुई और राज कपूर उन्हें ट्रॉफी देने भी आए।

जिस खाट पर सोते थे राजेंद्र कुमार वही हो गई मशहूर

राजेंद्र कुमार जब मुंबई हीरो बनने आए थे, तो बांद्रा स्टेशन के पास ही एक पुरानी बिल्डिंग में एक गेस्ट हाउस में ठहरे थे। जिसका नाम था बॉम्बे गेस्ट हाउस। इसमें धर्मेंद्र से लेकर राज कुमार जैसे लोग आकर रुके थे। राजेंद्र भी यहीं रुके और फिर बड़े स्टार बन गए।

गेस्ट हाउस के एजेंट ने बाद में उस खाट की खूब मार्केटिंग की। वह होटल में आए लोगों से कहता कि ये वही खाट है जिस पर राजेंद्र कुमार सोते थे और आज वे सुपरस्टार हैं। वो उस खाट पर सोने वालों से अच्छे खासे पैसे वसूलता था।

किस्मत चमकने का राज: बंगले ने बुंलदियों पर पहुंचाया

बात उस वक्त की है जब राजेंद्र कुमार बॉलीवुड में कदम जमाने की कोशिश कर रहे थे। तभी कॉर्टर रोड पर स्थित एक बंगले पर उनकी नजर पड़ी। उन्होंने उसे खरीदने का मन बनाया तो लोगों ने उन्हें समझाया कि ये भूत बंगला है। हालांकि राजेंद्र कुमार के पास उस बंगले को खरीदने के पैसे नहीं थे, तभी उनकी जिंदगी में बीआर चोपड़ा फरिश्ता बनकर आए।

चोपड़ा ने राजेंद्र को एक फिल्म के लिए एडवांस में पैसे दे दिए और साथ में दो फिल्मों का ऑफर भी। बस फिर क्या था राजेंद्र कुमार ने वह बंगला खरीद लिया। कमाल की बात थी कि उस बंगले को खरीदने के बाद राजेंद्र कुमार ने एक के बाद एक हिट फिल्में देने लगे। हालांकि कुछ वक्त बाद ही उनके कॅरिअर को ब्रेक लग गया और उन्होंने सपोर्टिंग रोल करने शुरू कर दिए।

हालात कुछ ऐसे बने कि उन्हें वह बंगला बेचना पड़ा और राजेश खन्ना ने वह 60 हजार रुपए में खरीद लिया। यही बंगला आगे चलकर ‘आशीर्वाद’ बंगले के नाम से जाना गया। पहले बंगले का नाम राजेंद्र कुमार की बेटी ‘डिंपल’ के नाम पर था।

80 में से 35 फिल्में जुबली हिट

80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 35 फिल्में जुबली हिट रहीं।
राजेंद्र कुमार को सामाजिक कार्यों के लिए लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।
‘कानून’ और ‘मेहंदी रंग लाग्यो’ (गुजराती फिल्म) के लिए राजेंद्र को जवाहरलाल नेहरू से नेशनल अवॉर्ड भी मिला।
03 साल तक 1964, 1965 और 1966 में लगातार राजेंद्र कुमार को फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला।
1969 में राजेंद्र कुमार को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।

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