New company Space Perspective wants to take you to the stratosphere via high-altitude balloon | कैप्सूल बैलून में बैठकर की जा सकेगी 10 हजार फीट ऊपर आसमान की यात्रा, 6 घंटे घूमने का किराया 96 लाख रुपए

  • अमेरिकी स्टार्टअप ‘स्पेस पर्सपेक्टिव’ 2024 में ‘स्पेसशिप नेप्च्यून’ की शुरुआत करेगा, इसमें 9 यात्री बैठ सकेंगे
  • दावा- फ्लाइट काफी सुरक्षित और आरामदेह होगी, बैठने के लिए खास तरह के कपड़ों की भी जरूरत नहीं होगी

दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 08:02 AM IST

ऐसे पर्यटक जो अंतरिक्ष की सैर करना चाहते हैं, उनका सपना 2024 तक पूरा हो जाएगा। स्पेस टूरिज्म स्टार्टअप ‘स्पेस पर्सपेक्टिव’ पर्यटकों को एक कैप्सूल बैलून में वायुमण्डल की सैर कराएगा।

स्टार्टअप ने कैप्सूल बैलून का नाम ‘स्पेसशिप नेप्च्यून’ दिया है, जिसमें 9 यात्री बैठ सकेंगे। यात्रा 6 घंटे की होगी। 2-2 घंटे वायुमण्डल तक पहुंचने और उतरने में लगेंगे। बचे हुए 2 घंटे में वायुमण्डल और अटलांटिक महासागर की खूबसूरती से रूबरू कराया जाएगा। 

10 हजार फीट ऊपर आसमान में सैर : ‘स्पेसशिप नेप्च्यून’ बैलून यात्रियों को 10 हजार फीट ऊपर ले जाएगा। बैलून में बड़े आकार की विंडो होंगी जहां से यात्री बाहर की खूबसूरती को कैप्चर कर सकेंगे। यह 2 घंटे तक वायुमण्डल में रहेगा, इस दौरान बैलून अटलांटिक महासागर के इर्द-गिर्द भी जाएगा।
ऐसे आया आइडिया : ‘स्पेसशिप नेप्च्यून’ बैलून को बनाने वाले स्टार्टअप को जेन पॉइंटर और टेबर मैक्लम ने मिलकर शुरू किया है। इनकी पिछली फर्म का नाम वर्ल्ड व्यू था जो अंतरिक्ष की तस्वीरों को सेंसर के जरिए खीचने का काम करती है। सेंसर को वायुमण्डल में जाने वाले बैलून में लगाया जाता था। ‘स्पेसशिप नेप्च्यून’ बैलून का आइडिया भी यहीं से आया है।
सुरक्षित और आरामदेह सफर का दावा : स्टार्टअप ने एक बयान में कहा है कि पहली बार हम स्पेस फ्लाइट लोगों के लिए तैयार कर रहे हैं। यह काफी सुरक्षित और आरामदेह रहेगी। इसमें बैठना प्लेन में बैठने जैसा होगा। इसमें बैठने के लिए किसी खास तरह के कपड़े पहनने की जरूरत नहीं है। 10 हजार फीट ऊंचाई पर जाकर यात्री अलग ही खूबसूरती का अनुभव करेंगे।
फ्लोरिडा से छोड़ा जाएगा बैलून : अमेरिकी स्टार्टअप के मुताबिक, बैलून को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से छोड़ा जाएगा। यह अटलांटिक महासागर पर मौजूद एक शिप पर उतरेगा। को-फाउंडर जेन पॉइंटर  का कहना है कि हम लोगों को अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 2023 में कुछ लोगों के लिए इसका ट्रायल होगा और 2024 में पूरी तरह से यात्रियों के लिए होगा। 

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